वर्ष २००८ बीतने को है. पिछले सालों की तरह इस बार भी प्रेम नफरत से हार गया. अहिंसा हिंसा से हार गई.
मैंने साल के शुरू में कुछ विश की थीं. उनमें से कुछ एक बार फ़िर दोहराता हूँ:
ब्लू-लाइन बस के नीचे आ कर कोई न मरे,
किसी वरिष्ट नागरिक की हत्या न हो,
किसी बच्चे पर अत्त्याचार न हो,
किसी स्त्री पर अत्त्याचार न हो,
सड़क पर गुस्से में हिंसा न हो,
पुलिस किसी असहाय नागरिक पर अत्त्याचार न करे,
किसी से भेद भाव न हो,
कोई आतंकवादी हमला न हो.
कोई विश पूरी नहीं हुई. कितने निर्दोष नागरिकों की जान गई. कितनी निजी और राष्ट्रीय संपत्ति का नुक्सान हुआ. ईश्वर से प्रार्थना है की वर्ष २००८ का बाकी बचा समय शान्ति से बीत जाए. वर्ष २००९ में फ़िर यही विश करूंगा और ईश्वर से प्रार्थना करूंगा की इस बात तो मेरी विश पूरी कर दो.